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बलिदान दिवस पर बड़ा सवाल: जब विधानसभा ने पारित किया संकल्प, तो आज तक “वीरांगना रानी दुर्गावती रेलवे स्टेशन” क्यों नहीं बना मंडलाफोर्ट?

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बलिदान दिवस पर बड़ा सवाल: जब विधानसभा ने पारित किया संकल्प, तो आज तक “वीरांगना रानी दुर्गावती रेलवे स्टेशन” क्यों नहीं बना मंडलाफोर्ट?

मंडला, 24 जून। आज पूरा महाकौशल और गोंडवाना अंचल वीरांगना Rani Durgavati का बलिदान दिवस मना रहा है। 24 जून 1564 को मातृभूमि और स्वाभिमान की रक्षा के लिए उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया था, जिसे आज भी “बलिदान दिवस” के रूप में स्मरण किया जाता है।

लेकिन बलिदान दिवस के अवसर पर मंडला की जनता एक बड़ा सवाल पूछ रही है—जब मध्य प्रदेश विधानसभा में मंडला रेलवे स्टेशन का नाम “वीरांगना रानी दुर्गावती रेलवे स्टेशन” करने संबंधी संकल्प पारित हो चुका है, तो आज तक उस पर अमल क्यों नहीं हुआ?

5 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश विधानसभा में बिछिया विधायक Narayan Singh Patta द्वारा प्रस्तुत अशासकीय संकल्प में मंडला रेलवे स्टेशन का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने की मांग उठाई गई थी। विधानसभा की कार्यवाही के वीडियो में अध्यक्ष द्वारा संकल्प पारित होने की घोषणा भी दिखाई देती है। इसके बाद स्वाभाविक अपेक्षा थी कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय को भेजकर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित कराएगी।

मगर छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो नाम परिवर्तन की कोई आधिकारिक घोषणा हुई और न ही जनता को यह बताया गया कि प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति क्या है।

जनता का आरोप है कि आदिवासी गौरव और गोंडवाना इतिहास की बात चुनावी मंचों तक तो सीमित रहती है, लेकिन जब सम्मान देने की बारी आती है तो फाइलें आगे नहीं बढ़तीं।

सबसे बड़ा सवाल अब मंडला के सांसद और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर भी उठ रहा है। यदि विधानसभा ने संकल्प पारित कर दिया था तो क्या सांसद ने रेलवे मंत्रालय के समक्ष इस विषय को प्रमुखता से उठाया? क्या राज्य सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेजा? यदि भेजा तो उसकी स्थिति क्या है? यदि नहीं भेजा गया तो आखिर क्यों?

जनभावनाओं से जुड़े इस मुद्दे पर अब आदिवासी समाज, सामाजिक संगठनों और रेल यात्रियों में असंतोष बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि जिस वीरांगना ने गढ़ा-मंडला की अस्मिता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, उनके नाम पर मंडला के प्रमुख रेलवे स्टेशन का नामकरण होना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि इतिहास और बलिदान का सम्मान है।

बलिदान दिवस पर मंडला की जनता का सीधा सवाल है—

“जब विधानसभा का संकल्प पारित हो चुका है, तो वीरांगना रानी दुर्गावती के सम्मान का यह निर्णय अभी तक रेलवे की फाइलों में क्यों अटका हुआ है?”

आज, जब पूरा देश रानी दुर्गावती के शौर्य को नमन कर रहा है, तब मंडला की जनता अपने जनप्रतिनिधियों से जवाब मांग रही है—सम्मान के संकल्प का परिणाम कब मिलेगा?

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