अतिथि शिक्षकों की बेबसी : रोजगार पर लटकी तलवार, सुरक्षित रोजगार की मांग पर अब भी अड़े
मण्डला। सरकारी स्कूलों की रीढ़ बने अतिथि शिक्षकों का सब्र दिन-प्रतिदिन जवाब देने लगा है। मंडला अतिथि शिक्षक परिवार ने कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक को 23 जून को ज्ञापन सौंपकर नौकरी की असुरक्षा का दर्द बयां किया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया ,कि सरकार के वादे सिर्फ कागजों में दम तोड़ रहे हैं और इधर प्रदेश के लाखों अतिथि शिक्षक जायज मांगों को लेकर सरकार के आमने-सामने बने हुए हैं।
मानदेय का सालों से इंतजार
जिला अध्यक्ष पी.डी. खैरवार ने बताया, कि जिले कुछ विकासखंडों का जुलाई 2025 का मानदेय अब तक अटका है। अनेकों बार आवेदन के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। लंबित मानदेय सहित हर माह समय पर भुगतान कराने की मांग कलेक्टर से की गई है।
भर्ती में ‘भाई-भतीजावाद’ का डर
संगठन ने आशंका जताई है, कि इस शिक्षा सत्र के लिए होने वाली अतिथि शिक्षक भर्ती में भाई-भतीजावाद हावी रहेगा। पात्र और अनुभवी अतिथि शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। ऐसी गड़बड़ियों की जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की गई।

प्रमुख मांगें:
- पूर्व सीएम शिवराज सिंह की घोषणा लागू कर अधिकतम अनुभव के आधार पर रोजगार सुरक्षित हो।
- अनुभव के आधार पर नौकरी पक्की हो, स्कोर कार्ड में अनुभव के अंक जुड़ें।
- सत्र 2026-27 के लिए 1 जुलाई तक कार्य अनुभवी अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति हो।
- पुराने अतिथि शिक्षकों को यथास्थान प्राथमिकता मिले, बीच सत्र में न निकाला जाए।
- भर्ती-ट्रांसफर से बाहर हुए अनुभवी शिक्षकों का रिक्त पदों पर समायोजन हो।
‘अब आश्वासन बहुत मिले,पर रोजी-रोटी का संकट नहीं मिटा’
ज्ञापन में कहा गया, कि लाखों अतिथि शिक्षक 2008 से कम मानदेय पर असुरक्षित नौकरी करते आ रहे हैं। सरकार की नीतियों से अब तक आधे से ज्यादा तो बाहर हो चुके हैं। संगठन ने चेतावनी दी है, कि मांगें अब भी नहीं मानी गईं तो आर-पार आंदोलन होगा जिसमें 18 साल सेवा के बाद अब सम्मान और सुरक्षा लेकर ही मानेंगे।
ज्ञापन अवसर पर मुख्य रूप से जिला कार्यकारिणी पदाधिकारियों की उपस्थिति रही।
रिपोर्ट- जितेंद्र कुमार भलावी 7049200695