वनांचल की मिट्टी की खुशबू को डिजिटल दुनिया तक पहुंचा रही हैं रमोतिन, आदिवासी परंपराओं को मिल रही नई पहचान
मंडला। मध्यप्रदेश के मंडला जिले का मवई क्षेत्र अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और परंपराओं के लिए जाना जाता है। इसी क्षेत्र की एक युवा आदिवासी बेटी रमोतिन तेकाम आज सोशल मीडिया के माध्यम से न केवल अपनी अलग पहचान बना रही हैं, बल्कि पूरे वनांचल की संस्कृति और परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने का कार्य भी कर रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 75 हजार से अधिक फॉलोअर्स के साथ रमोतिन तेकाम इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
रमोतिन के वीडियो की खास बात यह है कि उनमें कृत्रिमता नहीं, बल्कि आदिवासी जीवन की वास्तविक झलक दिखाई देती है। पारंपरिक परिधान, लोकगीत, रीति-रिवाज, त्योहार, कृषि कार्य, जंगल और प्रकृति से जुड़ा जीवन उनके वीडियो की मुख्य पहचान बन चुके हैं। यही वजह है कि उनके वीडियो को लोग बड़ी संख्या में पसंद और साझा कर रहे हैं।
सोशल मीडिया नहीं, संस्कृति संरक्षण का माध्यम
जहां अधिकांश लोग सोशल मीडिया का उपयोग मनोरंजन और लोकप्रियता के लिए करते हैं, वहीं रमोतिन तेकाम ने इसे अपनी संस्कृति को संरक्षित और प्रचारित करने का माध्यम बनाया है। उनके वीडियो में आदिवासी समाज की जीवनशैली, खान-पान, पारंपरिक वेशभूषा और सामाजिक मूल्यों की झलक देखने को मिलती है।

रमोतिन का मानना है कि आधुनिकता के इस दौर में यदि अपनी संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखना है, तो उन्हें नई पीढ़ी और डिजिटल मंचों तक पहुंचाना आवश्यक है। यही सोच उन्हें लगातार नए और रचनात्मक कंटेंट बनाने के लिए प्रेरित करती है।
सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी उपलब्धि
मवई जैसे वनांचल क्षेत्र में आज भी इंटरनेट और तकनीकी सुविधाएं महानगरों की तुलना में सीमित हैं। इसके बावजूद रमोतिन ने अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर सोशल मीडिया की दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सफलता केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि लगन और समर्पण से हासिल की जाती है।
उनके वीडियो में दिखाई देने वाली सादगी और प्राकृतिक जीवनशैली लोगों को आकर्षित करती है। यही कारण है कि उनके फॉलोअर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है और उनका प्रभाव क्षेत्रीय सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहा है।
युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
रमोतिन तेकाम की सफलता मवई क्षेत्र की अन्य युवतियों और युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी डिजिटल मंचों पर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रमोतिन ने जिस तरह अपनी संस्कृति को सम्मानपूर्वक प्रस्तुत किया है, वह पूरे आदिवासी समाज के लिए गर्व की बात है। उनके प्रयासों से युवाओं में अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ी है।
जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने की सराहना
रमोतिन तेकाम की इस उपलब्धि की क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, समाजसेवियों और सामाजिक संगठनों ने सराहना की है। उनका मानना है कि आदिवासी समाज की सकारात्मक छवि को डिजिटल मंच पर प्रस्तुत करना अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। इससे न केवल संस्कृति का संरक्षण होगा, बल्कि समाज की वास्तविक पहचान भी दुनिया के सामने आएगी।
अपनी मिट्टी से जुड़े रहने का संदेश
रमोतिन तेकाम का कहना है कि उनकी सफलता का श्रेय उनके परिवार, समाज और क्षेत्र के लोगों को जाता है। वे आगे भी आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को अपने वीडियो के माध्यम से लोगों तक पहुंचाती रहेंगी। उनका उद्देश्य केवल फॉलोअर्स बढ़ाना नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

आज जब सोशल मीडिया पर दिखावे और त्वरित लोकप्रियता की होड़ लगी हुई है, ऐसे समय में मवई की यह बेटी अपनी जड़ों से जुड़े रहकर समाज और संस्कृति के संरक्षण का संदेश दे रही है। रमोतिन तेकाम की यह यात्रा न केवल मंडला जिले, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।