20 दिनों की मेहनत से बांस और लकड़ी में साकार किया 6 फीट ऊंचा मीनाक्षी मंदिर
मंडला। गणेशोत्सव के पावन अवसर पर जहां शहर और गांवों में भगवान गणेश के भव्य पंडाल श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं, वहीं मंडला के प्रसिद्ध बॉटल आर्टिस्ट त्रिलोक सिंधिया ने अपनी अद्भुत कला और रचनात्मकता का परिचय देते हुए एक अनूठा इको-फ्रेंडली मीनाक्षी मंदिर तैयार किया है। अपने घर में विराजमान गणपति बप्पा के लिए बनाए गए इस मंदिर ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर तैयार किए गए इस मंदिर की ऊंचाई लगभग 6 फीट है। इसे पूरी तरह बांस और लकड़ी से निर्मित किया गया है। मंदिर की बनावट, बारीक नक्काशी और आकर्षक सजावट इसकी सुंदरता को और बढ़ाती है। खास बात यह है कि इस कलाकृति को तैयार करने में त्रिलोक सिंधिया ने करीब 20 दिनों तक लगातार मेहनत की।

मंदिर की संरचना में पारंपरिक भारतीय वास्तुकला की झलक दिखाई देती है। रंगों, डिज़ाइन और कलात्मक संतुलन ने इसे एक वास्तविक मंदिर जैसा स्वरूप प्रदान किया है। गणेश जी के दर्शन करने पहुंच रहे श्रद्धालु इस अनोखी कलाकृति की भी जमकर सराहना कर रहे हैं।

हर वर्ष कुछ नया करने की पहचान
त्रिलोक सिंधिया लंबे समय से अपनी रचनात्मक कला के लिए पहचाने जाते हैं। गणेशोत्सव के दौरान वे हर साल कोई न कोई नया प्रयोग कर लोगों को आकर्षित करते हैं। इस वर्ष मीनाक्षी मंदिर का चयन कर उन्होंने न केवल अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बांस और लकड़ी से तैयार यह भव्य मंदिर आस्था, कला और पर्यावरण जागरूकता का सुंदर संगम है। यही वजह है कि यह मंदिर गणेशोत्सव के दौरान क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
संवाददाता – मंडला
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